GST बिल कैसे बनाएं: फॉर्मेट, सैंपल और ज़रूरी जानकारी
GST बिल का कोई एक तय डिज़ाइन नहीं होता, लेकिन उसमें क्या-क्या लिखा होना चाहिए, यह तय है। यहाँ एक सैंपल बिल है, नियमों के अनुसार ज़रूरी जानकारी की सूची है, और मोबाइल से सही बिल बनाने का तरीका है।
आख़िरी बदलाव: 10 अक्टूबर 2026
GST बिल का सैंपल
यह एक किराना दुकान का टैक्स इनवॉइस है। ग्राहक उसी राज्य का है, इसलिए GST दो हिस्सों में बँटा है: CGST और SGST।
- सबसे ऊपर दुकान का नाम, पता और GSTIN
- बिल नंबर, तारीख़ और सप्लाई का स्थान
- हर आइटम के साथ HSN कोड, मात्रा, रेट और GST
- HSN के हिसाब से टैक्स का सार, शब्दों में कुल रकम और पेमेंट के लिए UPI QR


GST बिल में क्या-क्या होना ज़रूरी है
CGST नियमों का नियम 46 यह सूची देता है। बिल A4, A5 या रसीद के रोल पर किसी भी डिज़ाइन में हो सकता है, बस ये सब बातें उसमें हों:
- आपका नाम, पता और GSTIN (सप्लायर)।
- बिल नंबर: लगातार क्रम में, ज़्यादा से ज़्यादा 16 अक्षर या अंक (अक्षर, अंक, - और / चल सकते हैं), और पूरे वित्त वर्ष में अलग। एक से ज़्यादा सीरीज़ रख सकते हैं।
- बिल की तारीख़।
- ग्राहक का नाम, पता और GSTIN (या UIN), अगर ग्राहक रजिस्टर्ड है।
- ग्राहक रजिस्टर्ड नहीं है और टैक्सेबल वैल्यू ₹50,000 या उससे ज़्यादा है, तो ग्राहक का नाम और पता, डिलीवरी का पता, और राज्य का नाम और कोड।
- सामान का HSN कोड, या सेवा का SAC।
- सामान या सेवा का विवरण।
- सामान की मात्रा और इकाई।
- सप्लाई की कुल कीमत।
- छूट घटाने के बाद की टैक्सेबल वैल्यू।
- टैक्स की दर: CGST, SGST या UTGST, IGST, और जहाँ लागू हो वहाँ सेस।
- इनमें से हर एक के तहत टैक्स की रकम।
- दूसरे राज्य में बिक्री हो तो राज्य के नाम के साथ सप्लाई का स्थान।
- डिलीवरी का पता, अगर वह सप्लाई के स्थान से अलग है।
- टैक्स रिवर्स चार्ज पर देय है या नहीं।
- सप्लायर या उसके अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर।
यह आसान भाषा में सार है, कानूनी सलाह नहीं, और नियम बदलते रहते हैं। ताज़ा नियम CBIC की वेबसाइट पर नियम 46 में और GST काउंसिल के टैक्स इनवॉइस वाले नोट में देखें, या अपने CA से पूछें।
HSN कोड के कितने अंक लिखें?
| पिछले वित्त वर्ष का टर्नओवर | बिल पर HSN के अंक |
|---|---|
| ₹5 करोड़ तक | रजिस्टर्ड ग्राहकों (B2B) के बिल पर 4 अंक। आम ग्राहकों (B2C) के बिल पर वैकल्पिक। |
| ₹5 करोड़ से ज़्यादा | हर बिल पर 6 अंक। |
अपने सामान या सेवा का कोड GST पोर्टल की HSN / SAC खोज में देखें।
CGST + SGST या IGST?
यह सप्लाई के स्थान पर निर्भर है। अपने ही राज्य के ग्राहक को बेचने पर GST दो बराबर हिस्सों में बँटता है: CGST और SGST (केंद्र शासित प्रदेश में UTGST)। सप्लाई का स्थान दूसरा राज्य हो तो पूरा GST, IGST होता है। 18% पर ₹1,000 के सामान पर राज्य के अंदर ₹90 CGST + ₹90 SGST लगता है, और दूसरे राज्य में ₹180 IGST।
कोई भी रकम और दर GST कैलकुलेटर में आज़माएँ।
टैक्स इनवॉइस, बिल ऑफ़ सप्लाई और दूसरे दस्तावेज़
| दस्तावेज़ | कब बनता है |
|---|---|
| टैक्स इनवॉइस | रजिस्टर्ड कारोबार टैक्स वाला सामान या सेवा बेचता है। |
| बिल ऑफ़ सप्लाई | कंपोज़िशन डीलर बेचता है, या सामान या सेवा पर GST से छूट है। इसमें टैक्स नहीं दिखता। कंपोज़िशन डीलर ऊपर "composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies" लिखता है। |
| क्रेडिट नोट | बिल के बाद माल वापस आए या दाम घटे। |
| डेबिट नोट | बिल के बाद दाम बढ़े। |
| डिलीवरी चालान | माल बिना बिके भेजा जाए, जैसे जॉब वर्क के लिए या पसंद आने पर ख़रीदने के लिए। |
| रसीद वाउचर | सप्लाई से पहले एडवांस मिले। |
कितनी कॉपी?
सामान के बिल की तीन कॉपी बनती हैं: ओरिजिनल ग्राहक के लिए, डुप्लीकेट ट्रांसपोर्टर के लिए और ट्रिप्लीकेट आपके लिए। सेवा के बिल की दो: ओरिजिनल ग्राहक के लिए और डुप्लीकेट आपके लिए।
ई-इनवॉइस और ई-वे बिल
तय सीमा से ज़्यादा टर्नओवर वाले कारोबार (यह लिखते समय ₹5 करोड़) को अपने B2B बिल इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर दर्ज करने होते हैं, जहाँ से IRN और छापने के लिए QR कोड मिलता है। तय कीमत से ज़्यादा का माल भेजने पर ई-वे बिल भी लगता है। दोनों सरकारी पोर्टल पर बनते हैं। SahiBill IRN या ई-वे बिल नहीं बनाता और GST पोर्टल से नहीं जुड़ता।
मोबाइल से GST बिल बनाने का तरीका
SahiBill ऊपर की सारी जानकारी आपकी पहले से भरी चीज़ों से ख़ुद लगा देता है, इसलिए फॉर्मेट हाथ से नहीं बनाना पड़ता:
अपना बिज़नेस एक बार जोड़ें
नाम, पता, GSTIN, लोगो, हस्ताक्षर, बैंक की जानकारी और UPI ID। ये हर बिल पर आते हैं।
ग्राहक और आइटम चुनें
HSN कोड और टैक्स की दर आपके आइटम से आती है। CGST + SGST या IGST ग्राहक के राज्य से तय होता है।
सेव करें और भेजें
बिल नंबर अपने आप आगे बढ़ता है। PDF WhatsApp पर भेजें, A4 या A5 पर प्रिंट करें, या थर्मल रसीद निकालें।
GST बिल से जुड़े सवाल
क्या GST बिल का कोई एक सरकारी फॉर्मेट है?
नहीं। नियम यह तय करते हैं कि बिल में क्या लिखा हो, यह नहीं कि वह कैसा दिखे। A4, A5 या रसीद का रोल, कोई भी डिज़ाइन चलता है, बस ज़रूरी जानकारी उसमें हो।
टैक्स इनवॉइस और बिल ऑफ़ सप्लाई में क्या फ़र्क़ है?
टैक्स इनवॉइस में GST दिखता है और रजिस्टर्ड ग्राहक उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकता है। बिल ऑफ़ सप्लाई में टैक्स नहीं दिखता: इसे कंपोज़िशन डीलर बनाते हैं, और वे भी जो छूट वाला सामान या सेवा बेचते हैं।
क्या GST बिल Excel या Word में बना सकते हैं?
हाँ, कानून किसी ख़ास सॉफ़्टवेयर की माँग नहीं करता। असली मेहनत बिल नंबर का क्रम बनाए रखने, हर लाइन पर सही टैक्स लगाने और कुल रकम को रिटर्न से मिलाने में है। बिलिंग ऐप ये काम ख़ुद करता है और स्टॉक और पार्टी बैलेंस भी साथ में अपडेट रखता है।
क्या मोबाइल से GST बिल बना सकते हैं?
हाँ। SahiBill में ग्राहक और आइटम चुनिए, और बिल PDF के रूप में WhatsApp पर भेजने या प्रिंट करने के लिए तैयार है। यह बिना इंटरनेट के चलता है।
क्या GST बिल पर हस्ताक्षर ज़रूरी हैं?
नियम सप्लायर या उसके अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर माँगते हैं। SahiBill में हस्ताक्षर एक बार जोड़िए और वह हर बिल पर छपता है।
क्या SahiBill GST रिटर्न फ़ाइल करता है या ई-इनवॉइस बनाता है?
नहीं। SahiBill आपके बिलों से GSTR-1, GSTR-3B और HSN सार तैयार करता है, ताकि आप उन्हें जाँचकर अपने CA को भेज सकें। यह रिटर्न फ़ाइल नहीं करता, IRN या ई-वे बिल नहीं बनाता, GST पोर्टल से नहीं जुड़ता, और यह सरकारी ऐप नहीं है।
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हर बिल में फॉर्मेट सही रखें
SahiBill आपके बिल पर GSTIN, HSN कोड और सही GST लगाता है। कोई विज्ञापन नहीं। बिना इंटरनेट चलता है।